सिरोही। पूर्व मुख्यमंत्री सलाहकार संयम लोढा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से यह पूछा है कि उन्हें यह बताना चाहिए कि आदर्श घोटाले में पर्वतन निदेशालय भारत सरकार द्वारा 2019 में जो सम्पत्ति अटैच की गई और जिसके लिए महानिरीक्षक मुद्रांक व पंजीयन को पत्र के जरिये सम्पत्ति की सूचियों सहित यह सूचित किया गया कि इसमें किसी भी सम्पति का बेचान उनकी अनुमति के बिना नही किया जाए तो 2019 में अटैच की गई सम्पति का सितम्बर 2024 में नामांतरण लिक्विडेटर अवसायक के नाम पर नामांतरण बिना पर्वतन निदेशालय की अनुमति के कैसे हो गया और इतना ही नही उनमें से एक सम्पति को 2025 में औने पौने दामों में बेच भी दी गई। दिसम्बर 2024 में पर्वतन निदेशालय ने 122 पेज के आदेश के जरिये प्रोविजनल अटैचमेंट की फिर सूची जारी की है इनमें से भी अनेक सम्पतियों का नामांतरण बिना पर्वतन निदेशालय की अनुमति के अवसायक लिक्विडेटर के नाम खोल दिया गया। जब यह मामला उठाया गया तब कुछ दिन बेची गई कृषि भूमि का नामांतरण रोककर करके रखा गया लेकिन बाद में दिल्ली के ईशारे पर भजन मंडली ने इतनी अधिक तेजी के साथ कागज चलाए कि आईजी स्टाम्प भी उस नामांतरण को खोलने के लिए चिट्ठी लिख रहा है, डीआईजी स्टाम्प भी उस नामांतरण को खोलने के लिए चिट्ठी लिख रहा है, ऐसे क्या हो गया कि पूरी सरकार नामांतरण को खोलने लिए पागल हो रही है। यह सिरोही ही नही पूरे राजस्थान की जनता की मेहनत की कमाई से खडी हुई सम्पति को लूटने का षडयंत्र है।

संयम लोढा, सोनिया गांधी व राहुल गांधी के साथ राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से की गई ईडी की कार्यवाही के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित धरना प्रदर्शन को संबोधित कर रहे थे।
इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों ने कलक्टर कार्यालय के बाहर जाकर अपना विरोध प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर लोढा ने कहां कि देश में इंदिरा गांधी को खोने के बाद राजीव गांधी को राजनीति में आगे बढना बडा। राजीव गांधी का पांच साल प्रधानमंत्री के कार्यकाल था उस कार्यकाल में उन्होंने देश को 25 साल आगे लाया। देश में बाबा साहब के संविधान के बाद से लोग देश में सम्मान की जिंदगी जी रहे है। सोनिया गांधी ने देश को सोचा और मन मोहन सिंह को 2004 में प्रधानमंत्री बनाया। महात्मा गांधी नरेगा कानून कांग्रेस सरकार की देन है। लोगो को रोजगार दिया। मनमोहन सिंह सरकार ने अनेक जनहित के फैसले किये है। अधिकारी राजनीतिक दबाव में कार्य कर रहे है, जनता के कोई कार्य नही हो रहे है, जनता के साथ न्याय नही हो रहा है। हमारी विपक्ष की जिम्मेदारी है कि जनता के साथ गलत हो रहा है तो हम उसकी आवाज उठाए। प्रजातंत्र को खत्म करने का कार्य हो रहा है। हमने कानून का सम्मान करने वाले लोग है, हम कानून की पालना करना हम दूसरों को भी सिखाते है और आगे भी सिखाएंगे। पाली में जेजेएम में करोडो का भुगतान हो गया लेकिन अभी तक कोई मुकदमा नही हुआ है। इस लडाई को हमे पूरी ताकत से लडना है।
विधायक मोतीराम कोली ने धरने को सम्बोधित करते हुए कहा कि जिले में प्रशासन भ्रष्टाचार के नशे में चूर है। हर जगह लेन-देन की सूचनाएं और चर्चाएं गली-चैराहे पर है लेकिन जिले के मंत्री व भाजपा के नेताओं को आमजनता की कोई सुध नहीं है। पहले भी कई सरकारें रही है लेकिन राजनितिक द्वेष भावना से कभी कोई कार्यवाही किसी पर नहीं हुई। हाल में मौजुदा केन्द्र सरकार हर किसी को अपने आगे झुकाना चाहती है लेकिन त्याग और बलिदान की भावना से बनी कांग्रेस पार्टी किसी के डर के आगे झुकेगी नहीं।
जिलाध्यक्ष आनंद जोशी ने पीसीसी के निर्देशों की जानकारी देते हुए ब्लॉक स्तर तक इस अभियान को चलाने की अपील की।
धरने को पूर्व जिला प्रमुख अन्नाराम बोराणा, राजेन्द्र सांखला ने केन्द्र सरकार के इशारों पर चल रही केन्द्रीय जांच एैजेन्सियों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान उठाते हुए कहा कि हर स्वतन्त्र एैजेन्सियों को भाजपा अपनी युनिट बनाकर काम करवा रही है। जो कि लोकतन्त्र की हत्या है। धरने को ब्लॉक अध्यक्ष कृष्णवीरसिंह देवडा, अचलसिंह बालिया, रामसिंह सिसोदिया, रतनलाल माली, युकां जिलाध्यक्ष प्रकाश मीणा, हर्षुल अग्रवाल, जैसाराम मेघवाल, दशरथ नरूका, पुष्पेन्द्रसिंह देवडा, ललिता गरासिया, ईब्राहीम खान आदि ने सम्बोधित करते हुए अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर पूर्व विधायक गंगाबेन गरासिया, केपीसिंह डबाणी, ब्लॉक अध्यक्ष रताराम देवासी, गणेश बंजारा, हनवन्तसिंह मेडतिया, किशोर पुरोहित, जोगाराम मेघवाल, दलपतसिंह नागाणी, तखतसिंह भैरूगढ, रसीद गौरान, सुभाष चौधरी, लखमाराम कोली, महेशदान चारण, महेन्द्रसिंह जोलपुर, तेजाराम मेघवाल, ओमप्रकाश कोली, सुल्तानसिंह पीथापुरा, महिपालसिंह डाक, कानाराम मेघवाल, उत्तम चौधरी, मुकेश जोशी , रमेश चौधरी, मफतलाल बुनकर, भूवनेष मीणा, पूरणसिंह बागसीन, पुनीत अग्रवाल, परबतसिंह काबा, दशरथ कोली, प्रकाश कोली समेत सैकडों कांग्रेसजन उपस्थित रहे।
