◆गरबे चढ़े परवान पर, नवरात्रि महोस्त्व में रात्रि में गरबो की धूम
◆जावाल में 251 किलो घी से बनी महाकाली व काल भैरव की प्रतिमा श्रद्धालुओं को कर रहे आकर्षण
सिरोही — रमेश टेलर ।नवरात्रि महोस्टव में अब रात्रि में गरबे परवान पर चढ़ रहे है। ज्यो ज्यो नवरात्री के दिन घट रहे है त्यों त्यों सिरोही समेत क्षेत्र के गांवो में गरबो नृत्य करने के खास कर युवा युवातियाँ रंग बिरंगे परिधान पहन कर गराबा पांडालों में देर रात गराबा नृत्य करते हैं।
तो वही गांवों में देवी देवताओं की वेशभूषा में युवा गराबा नृत्य करते है जिसे देखने के लिए काफी संख्या में ग्रामीण देर रात तक पांडालों में डटे रहते हैं।
◆स्वर्ग लोक से मानो देवता जमी पर उतर आये हो
जावाल के श्री चामुंडा गराबा मंडल के तत्वाधान में आयोजित नवरात्रि महोस्त्व के दोरान श्री साँचीयाव माता मंदिर परिषर में गरबो का आयोजन किया जा रहा है। उस दौरान मानो स्वर्ग लोक से देवता जमी पर गरबा नृत्य करने उतर आये हो, गरबो के दोरान युवा देवी देवताओं की वेशभूषा धारण कर जैसे ही गराबा पांडाल में आते है वैसे ही लगता है कि स्वर्ग लोक से देवी देवता जमी पर गराबा नृत्य करने उतर आये हो…. जैसे ही गरबो के दौरान महाकाली के साथ काला गोरा भेरू का पांडाल में आगमन होता है वेसे ही काल भैरव अपने मुंह से आगे के गोले निकाल कर सभी को मंत्रमुग्ध कर देते है। गरबो का लुफ्त उठाने के लिए जावाल समेत आसपास के गांवों से सेकड़ो श्रद्धालू देर रात गराबा पांडाल में डटे रहते हैं।
◆साँचीयाव माता मंदिर पर की जाती है दूधिया रोशनी
जावाल के श्री साँचीयाव माता का मंदिर सफेद मारबल से निर्मित है जिस पर नवरात्रि के दौरान दूधिया रोशनी के साथ आधुनिक रँगबिरगी रोशनियों से सजाया जाता है आने वाले श्रद्धालुओं का मन मोह लेता है।
◆251 किलो घी से निर्मित महाकाली व काल भैरव की प्रतिमा आकर्षण बनी
जावाल के साँचीयाव माता मंदिर परिषर में गरबो के दौरान इस बार 251 किलो घी से निर्मित महाकाली मां व काल भैरव की प्रतिमा आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। घी से निर्मित प्रतिमाओं को विशेष पांडाल में स्थापित किया गया है। जिसमे वातावरण को ठंडा बनाये रखने के लिए कूलर व बर्फ की शिलाएं रखी जाती है जिससे गर्मी में घी से बनी प्रतिमाएं पिघलती नही हैं।
◆21 साल से घी की बनी प्रतिमाएं बनी आकर्षण का केंद्र
श्री चामुंडा गराबा मंडल के तत्वाधान में आयोजित नवरात्रि महोस्त्व में पिछले 21 साल से अलग अलग देवी देवताओं की घी की प्रतिमाएं बनाई जाती है। जिसे बनाने के लिए गुजरात के आंनद से विशेष कारीगर आ कर 5,6 दिन की कड़ी मेहनत कर के घी की प्रतिमाएं बनाते है। एक बारगी तो ऐसा ही लगता है कि ये वास्तव में घी से निर्मित प्रतिमा है या मारबल से बनी है।
घी से निर्मित प्रतिमाओं को नवरात्रि महोस्त्व तक बड़े ही सुरक्षा से रखा जाता है जिसके लिए अलग से व्यवस्था की जाती है और नवरात्रि महोस्त्व पूर्ण होने से घी से बनी प्रतिमाओं की गांव में शोभायात्रा निकाली जाती है जो गांव के मुख्य मार्गो से होते हुए पास के तालाब या बांध में विषर्जन किया जाता हैं।
