भारतीय शिक्षा अंतर्निहित भावों का बाह्य प्रकटीकरण हैं:- प्रांतीय निरीक्षक गंगा विष्णु
आहोर । विद्या भारती जोधपुर प्रांत की योजनानुसार आदर्श शिक्षण संस्थान जालोर के तत्वावधान में संचालित जिलेभर के 32 विद्यालयों का आचार्य सम्मेलन आदर्श विद्या मंदिर उच्च प्राथमिक भीनमाल में शुरू हुआ।

उद्घाटन सत्र में विद्या भारती जोधपुर प्रांत निरीक्षक गंगा विष्णु , प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. श्रवण कुमार मोदी, प्रांतीय एकल विद्यालय प्रमुख देयरामाराम विश्नोई , जिला उपाध्यक्ष भंवरलाल कानूनगो, आदर्श शिक्षण संस्थान जालोर जिला सचिव अजय कुमार गुप्ता, जिला निरीक्षक नरेंद्र आचार्य, आदि ने दीप प्रज्वलित किया। जिला सचिव अजय कुमार गुप्ता ने बताया कि सम्मेलन में 294 आचार्य बंधु-दीदी, प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उद्घाटन सत्र में प्रांत निरीक्षक गंगा विष्णु ने भारतीय शिक्षा पद्धति के महत्व को प्रतिपादित किया। उन्होंने बताया कि भारतीय शिक्षा बाल केंद्रित और क्रिया आधारित शिक्षण को वरीयता देती है। आज फिर से उसी परम्परा में लौटने की जरुरत है। भारतीय शिक्षा ज्ञान और चरित्र का विकास करता हैं। शिक्षा अंतर्निहित भावों का बाह्य प्रकटीकरण हैं। विद्या भारती भारतीय शिक्षा पद्धति के पुनर्स्थापन के लिए प्रत्यनशील है। शिक्षा तभी व्यक्ति एवं राष्ट्र के जीवन के लिए उपयोगी होगी, जब वह भारत के राष्ट्रीय जीवन दर्शन पर अधिष्ठित होगी। पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुकरण कर मनुष्य मानवता से दूर भाग रहा है। इससे प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है और मानव का विनाश निश्चित है। आज के संदर्भ में कह सकते हैं कि समाज को गरीबी, विषमता, भेदभाव से मुक्त करना ही विद्या का असली उद्देश्य है। इसी उद्देश्य
को प्राप्त करने के लिए 2020 में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनाई गई। एक शिक्षक को अभ्यास के साथ ज्ञान जीवंत और व्यावहारिक शिक्षण प्रथाओं और सिद्धांतों को अपनाना चाहिए। शिक्षण का उद्देश्य तभी पूर्ण माना जाता है, जब वह मूल्यांकन प्रक्रिया को भी समायोजित करता है। सम्मेलन के प्रबंध प्रमुख प्रधानाचार्य अमित व्यास ने बताया कि प्रथम दिन विद्यालय के शिक्षण विषयों पर प्रशिक्षण के साथ आचार्यों को अभिनव पंचपदी शिक्षण पद्धति, सुलेख, स्पोकन इंग्लिश, नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति में अध्यापक की भूमिका विषयों पर जानकारी देते हुए अभ्यास करवाया। आचार्यों के व्यक्तित्व विकास के साथ शारीरिक, योग, संगीत, नैतिक व अध्यात्मिक, संस्कृत, क्रिया आधारित शिक्षा, सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी आचरण, नागरिक कर्तव्य, विद्यालय के शिक्षण विषयों पर प्रशिक्षण व अनेक शैक्षिक विषयों पर मंथन एवं क्रियान्विति पर चर्चा की जाएगी। तीन दिवसीय कार्यक्रम में प्रांतीय अधिकारियों का सानिध्य मिलेगा। सम्मेलन में विष्णु दान चारण , प्रमोद दवे, बीना शर्मा,जिला संस्कार केंद्र प्रमुख कांतिलाल सूर्या,विक्रम सिंह, जयंती लाल प्रजापत, उत्तम बालोत, महेंद्र प्रजापत, भरत वैष्णव,उर्मिला,विक्रम प्रजापत, गजाराम, चंपालाल,महावीर सिंह, रमेश कुमार दर्जी, सहित आदि आचार्य दीदी मौजूद रहें।
