लोकल फॉर वोकल : हथकरघों पर निर्मित लेटा के कंबल,पट्टे, गलीचा, कालीन,जैकेट,कोटी देशभर में पहचान बना रहा :- विधानसभा मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग, सीएम भजनलाल शर्मा, पीएम नरेंद्र मोदी भी सराहना कर चुके
जालौर । (सुरेश गर्ग रोडला) विशेष हस्तशिल्प उद्योग के रूप में पहचान वाले लेटा के खेसला(कंबल ), पट्टे, गलीचा, कालीन, कोटी अब देशभर में नाम कमाने लगा हैँ। लेटा के खेसला (कंबल), खेस से बना नेहरू जैकेट, जैकेट /अचकन /कोटी सहित खेस से कंबल, पट्टे, गलीचा, कालीन, कोटी लोकल फॉर वोकल में नवाचार की मुहिम के तहत राजस्थान विधानसभा के मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने हथकरघा निर्मित खेसले से बनी कोटी पहनकर उद्योग को बढाने की पहल की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी खेस से बने जैकेट की काफी तारीफ कर चुके है। वही लेटा के हथकरघा उद्योग को बढावा देने के लिए गर्ग ने नवाचार पहल के तहत कार्यक्रमों में शाल ओढानें की जगह खेस का इस्तेमाल करने की अपील भी की थी।
◆देशभर में लेटा के खेसले की डिमांड
जालोर के निकटवर्ती लेटा गांव में हथकरघा से बना कंबल, पट्टे, गलीचा, कालीन, कोटी, अचकन बनते है जो की जालोर की देशभर में पहचान बना चुका है. खास बात यह है कि यह 100% शुद्ध कपास से तैयार होता है। खेस पतले कंबल की तरह का कपड़ा होता है जो बिना किसी केमिकल के इस्तेमाल से चरखे पर काते सूत या मोटे धागे से बनता हैं। इसका उपयोग हर मौसम में किया जा सकता है। इस कपड़े की खासियत यह है कि यह सर्दियों में गर्म और गर्मियों में ठंडा रहता है। इस उद्योग से जुड़े कारीगर मिश्रीमल बताते हैं कि कई पीढियों से यह काम चल रहा हैँ। लेटा के खेस राजस्थान में ही नहीं बल्कि दुसरें प्रदेशों में भी प्रसिद्ध हैं।गुजरात सहित आसपास के इस खेसले की डिमांड ज्यादा रहती हैं आज भी जालोर के खेसले को स्थानीय क्षेत्र के प्रवासी बडे उत्साह से खरीद करते हैं।
