Sunday, May 3, 2026
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बी.आई.एन. जैसलमेर ने राष्ट्रपति के नाम जिलाधीश को सौंपा ज्ञापन

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जैसलमेर। (महेंद्र सिंह) बुद्धिस्ट इन्टरनैशनल नेटवर्क के राष्ट्रीय संरक्षक मा. वामन मेश्राम के आह्वान पर चलाए जा रहे पांच चरणों में घोषित चरणबद्ध राष्ट्रव्यापी आंदोलन महाबोधी महाविहार मुक्ति आंदोलन के तहत बी आई एन जैसलमेर शाखा के जिलाध्यक्ष शिवदानाराम राठौड़ के नेतृत्व में आंदोलन के दूसरे चरण में शनिवार को धरना प्रदर्शन कर महामहिम राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया।

धरना प्रदर्शन में शिवदानाराम राठौड़, महिंद्रा बौद्ध, केशराराम, कैलाश राठौड़, गिरधारीलाल कोहली, दिनेशकुमार हिंगड़ा, मूलाराम लीलावत, प्रेमाराम भील, कैलाश बालोच सहित बहुजन समाज के कई लोग मौजूद रहे।

ज्ञापन में वर्णित सात देशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन के मुद्दों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण नई दिल्ली के निदेशक महोदय को भेजकर आग्रह जताया l

ये निम्नांकित मुद्दे हैं :-

1. महाबोधि टेंपल एक्ट 1949 यह बौद्धों ने नहीं बनाया है यह तो ब्राह्मणों ने अपना वर्चस्व कायम करने के लिए बनाया हुआ षड्यंत्रकारी कानून है। उसके माध्यम से ब्राह्मणों का महाबोधि महाविहार पर नाजायज कब्जा हो गया है। इस एक्ट में अंतरराष्ट्रीय धरोहर के कानून का भी उल्लंघन होता है। इसलिए महाबोधि टेंपल एक्ट 1949 को रद्द करके इसकी जगह नया एक्ट बनाया जाए, जिसमें सारे के सारे सदस्य यह बौद्धों के होने चाहिए।
2. महाबोधि महाविहार परिसर में शिवलिंग कैसे है? बीटीएमसी क्या कर रही है? महाबोधि महाविहार यह बौद्धों की विश्व धरोहर है, यह बात 1895 के अनागरिक धर्मपाल बनाम महंत के केस के जजमेंट से सिद्ध हुआ है। इसके बावजूद मुख्य मंदिर के ही बगल में शिवलिंग को स्थापित करना और दीवार पर पांडवों का जिक्र करना , यह विश्व धरोहर का अपमान करना है।
3. महाबोधि महाविहार मूलतः बौद्धों की विश्व धरोहर है, इसकी पुष्टि फ़ाह्यान ओर ह्वेनसांग के सफरनामे से और महाबोधि महाविहार उत्खनन रिपोर्ट से सिद्ध होता है। अत: इस स्थल को बौद्धों को सुपुर्द किया जाए।
4. महंत के कोठी में सैकड़ों बुद्ध की प्रतिमाएं, शिलालेख ओर अभिलेख पड़े है। क्या महंत उसका मालिक है? उसे तुरंत प्रभाव से ए एस आई के बोधगया संग्रहालय को सुपुर्द किया जाए।
5. महाबोधि महाविहार के आसपास के परिसर में विधर्मी लोग बड़े पैमाने पर लाउड स्पीकर लगाकर माहौल को जानबूझकर खराब कर रहे है। इसको संज्ञान में लिया जाए।
6. महाबोधि महाविहार के पास ही सम्राट अशोक का महल था, जिसे फ्रांसिस बुकानन ने देखा था, उसे ढूंढकर बोधगया का इतिहास उजागर किया जाए।
7. EVM मशीन के द्वारा केवल बौद्धों का ही नहीं बल्कि समस्त भारतीय नागरिकों के मतदान का अधिकार प्रभाव शून्य हो गया है। अब EVM मशीन को हटाकर समस्त चुनाव बेलेट पेपर से कराया जाए।

उपरोक्त मांगो को लेकर बुद्धिष्ट इंटरनेशनल नेटवर्क के द्वारा पांच चरणों में चरणबद्ध आंदोलन किया जा रहा है।

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