Saturday, January 31, 2026
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खांसी-जुकाम और बुखार के मामलों में सतर्कता बरतें — सीएमएचओ डॉ. दिनेश खराड़ी

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◆बच्चों में बिना डॉक्टर की सलाह के कफ सिरप का उपयोग न करें, घरेलू उपचार को बढ़ावा दें

सिरोही – (रमेश टेलर) जिले में मौसमी बदलाव के साथ खांसी, जुकाम और बुखार के मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. दिनेश खराड़ी ने आमजन, अभिभावकों, चिकित्सकों और फार्मासिस्टों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

उन्होंने कहा कि अधिकांश मामलों में सामान्य खांसी-जुकाम अपने आप 7 से 10 दिनों में ठीक हो जाता है और इसके लिए एंटीबायोटिक या कफ सिरप जैसी दवाओं की आवश्यकता नहीं पड़ती।

डॉ. खराड़ी ने बताया कि सामान्य खांसी-जुकाम की स्थिति में घरेलू प्राथमिक उपचार सबसे प्रभावी और सुरक्षित विकल्प है।
उन्होंने कहा कि बच्चे को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ (जैसे गुनगुना पानी, सूप, नारियल पानी, दूध आदि) पिलाएँ ताकि शरीर में पानी की कमी न हो और गले की खराश में राहत मिले।
साथ ही, बच्चे को पर्याप्त आराम दिलाना अत्यंत आवश्यक है।
एक वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों के लिए शहद का सेवन खांसी में आराम पहुंचाता है, वहीं भाप (स्टीम) लेने और नाक में सलाइन ड्रॉप डालने से नाक बंद होना और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याओं में काफी राहत मिलती है। कफ ◆सिरप के दुष्प्रभाव और सावधानी

सीएमएचओ ने स्पष्ट किया कि कई बार लोग बच्चों को राहत देने के लिए बिना डॉक्टर की सलाह के Dextromethorphan युक्त कफ सिरप दे देते हैं, जो अत्यंत हानिकारक हो सकता है।
यह दवा छोटे बच्चों में गंभीर दुष्प्रभाव उत्पन्न कर सकती है, जैसे —
• सांस की गति धीमी पड़ना,
• अत्यधिक सुस्ती या नींद आना,
• उल्टी, बेहोशी या मिर्गी जैसे दौरे आना।
उन्होंने कहा कि 4 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यह दवा बिल्कुल भी नहीं देनी चाहिए, और बड़े बच्चों को भी केवल चिकित्सकीय सलाह पर ही दी जानी चाहिए।
डॉ. खराड़ी ने बताया कि पैरासिटामोल बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित ज्वरनाशक दवा है। उन्होंने चेतावनी दी कि 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में पैरासिटामोल की अधिक मात्रा देने से लीवर और किडनी संबंधी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं, इसलिए किसी भी स्थिति में दवा की मात्रा स्वयं न बढ़ाए

चिकित्सकों और फार्मासिस्टों के लिए निर्देश

सीएमएचओ ने सभी चिकित्सकों से अपील की कि वे बाल रोगियों में खांसी के इलाज में Dextromethorphan युक्त सिरप का प्रयोग यथासंभव न करें, एवं चार वर्ष से छोटे बच्चे को बिल्कुल ना देवे और यदि चार वर्ष से अधिक बच्चे के लिए आवश्यक हो तो उम्र एवं वजन के अनुसार सीमित मात्रा में दें।
साथ ही उन्होंने फार्मासिस्टों को निर्देश दिए कि वे बिना चिकित्सकीय पर्ची के किसी भी कफ सिरप या अन्य दवा का वितरण न करें।
फार्मासिस्टों से यह भी कहा गया कि वे अभिभावकों को हर दवा की मात्रा, संभावित जोखिम और सही उपयोग विधि के बारे में स्पष्ट जानकारी दें।

सावधानी ही सबसे अच्छा उपचार

डॉ. खराड़ी ने कहा कि अभिभावकों की थोड़ी सी सावधानी बच्चों को दवाओं के दुष्प्रभावों से बचा सकती है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि सामान्य खांसी-जुकाम के लिए अनावश्यक दवाओं का प्रयोग न करें और बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें।

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