◆ आस्था ऐतिहासिक सोमनाथ महादेव मंदिर में दर्शनों के लिए वर्षभर लगा रहता है भक्तों का तांता
आहोर । मुख्यालय व तहसील मुख्यालय से 22 किलोमीटर दूर सराणा स्थित सोमनाथ महादेव का मंदिर ऐतिहासिक शौर्य गाथा का प्रतीक है यह मंदिर जिले समेत प्रदेश भर में खास पहचान रखता है। यहा दर्शनों के लिए वैसे तो वर्ष भर तांता लगा रहता है, लेकिन महाशिवरात्रि व श्रावण मास में तो भक्तों का सेलाब ही उमड़ पड़ता है जहां की शिवलिंग एक चौकोर प्रकार की है मंदिर का ग्रभ गृह जमीन से तीन फुट निचे शिवलिंग स्थापित है जिसमें सोमनाथ ही नहीं बल्कि शिव परिवार स्थित है इसी शिवलिंग में दोनों तरफ शिवलिंग के लिए अपने प्राणों की आहुति दी उनके भी दृशय अंकित है जो पाटन राजा के सेनापति रतना व हमिरा राजपुत दोनो घोड़े पर बेठे हुए व कान्हड़ और वैगढ दो भील हाथों में तिर लिए दृश्य अंकित है गांव में स्थित सोमनाथ महादेव मंदिर न केवल गुजरात के सोमनाथ महादेव मंदिर को समेटे हुए बल्कि जालोर के शासक वीर कान्हडदेव की शुरविरता का भी साक्षी है । दिल्ली का सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी 1266 में जब गुजरात के सोलंकी साम्राज्य को परास्त करने के बाद गुजरात के सोमनाथ महादेव मंदिर को तोड व लुट कर जब दिल्ली लोट रहा था । तब जालोर के तत्कालीन शासक वीर कान्हडदेव ने उसे सराणा के रण में परास्त किया व हाथी के पेर में जंजीरो से बंधी शिवलिंग गांव सराणा के पेयजल के जलस्त्रोत (पेजके) में डाली गई जो अलाउद्दीन खिलजी ने उसे निकालने के लिए 9 लाख हाथी घोड़े सेना की फोज से भी कुएं का जल स्तर कम नहीं हुआ और आज भी कुएं के उपर जंजिरो के निशान पड़े हुए हैं सोमनाथ महादेव के आशिर्वाद से आज गांव सराणा में पानी का जल स्तर 110 फिट गहरा है जो पिने योग्य पानी है हिन्दू धर्म में हमारे देवी देवताओ के मंदिर के द्वार पुर्व दिशा में नहीं होते जबकि यहां पूर्व दिशा में खोला जाता है सोमनाथ महादेव मंदिर में गुजरात से पैदल जत्था सराणा पहुंचता है जिसमें आस पास के गांवों के कुल देवता के रुप में माने जाते हैं जिसमें महाशिवरात्रि पर चार आरती व विभिन्न श्रृंगार के साथ शिवलिंग को सजाया जाता है सोमनाथ मंदिर में सोमवार के दिन तीन आरती की जाती है पूनः सोमनाथ महादेव मंदिर का जिर्णोद्धार ब्रह्मालीन मंहत बालकान्नदगिरी महाराज के सानिध्य में अस्सी के दशक में करवाया जिसकी भव्य प्रतिष्ठा का आयोजन कर तीन शिखर का मंदिर जो दृश्य स्थल बना हुआ है आज मंदिर में उनके शिष्य मंहत सोमगिरि है
◆ संत की जीवित समाधि
सोमनाथ महादेव मंदिर के सामने हीरागीरी महाराज की जीवित समाधि है जिनके कहीं चमत्कार आज भी साक्ष्य बने हुए हैं महाराज ने एक ही समय में दो गांवों में सराणा व बाला गांव में एक साथ जीवित समाधि ली जिसमें आज भी गांव में शाम के समय समाधी पर दिपक लगाने के लिए लाईन लगी रहती है गांव में आज दो राजपुत परिवारो के ठिकाने हैं जो मण्डलावत व बालोत परिवार है
● सोमनाथ महादेव मंदिर की ऐतिहासिक गाथा इतिहास के पन्नों पर समाहित है मंदिर का पुनः निर्माण ब्रह्मालीन मंहत बालकान्नदगिरी महाराज व पूर्व विधायक व ठाकुर साहब नरपतसिंह मण्डलावत व गांव सराणा व आस पास के गांवों के सानिध्य में मंदिर का पूनः निर्माण हुआ – वंदन सिंह मण्डलावत ,ग्रामीण सराणा
● सोमनाथ महादेव मंदिर ऐतिहासिक शौर्य गाथा है जो आस्था का प्रतीक है भक्तों की मन्नत पूरी होती है यहां की शिवलिंग चौकोर भाग में जो कहीं नहीं है श्रावण मास में भक्तों का सेलाब उमड़ पड़ता है शिवलिंग में शिव ही नहीं शिव परिवार समाहित है और दोनों तरफ दो राजपुत व पिछे दो भिल के दृश्य अंकित है- पं.रमेशचन्द्र दवे
सोमनाथ महादेव मंदिर के पुजारी
● यह ऐतिहासिक गांव है यहां सोमनाथ महादेव की मनोहारी शिवलिंग है जो जमीन से निकली हुई हैं शिवलिंग का अनोखा रुप है शिव भक्तों द्वारा मन्नत मांगी गई सोमनाथ महादेव पुरी करते हैं – मंगलाराम चौधरी, ग्रामीण सराणा रिटायर्ड अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त जयपुर
