Saturday, January 31, 2026
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दिपावली पर मिट्टी के दीपकों की बढ़ी मांग, स्वदेशी को मिल रहा है बढ़ावा, पुस्तेनी काम को आज भी जिंदा रखे हुये है कुम्हार जाती के लोग

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स्वदेशी को लेकर अच्छी बिक्री की जगी उम्मीद

सिरोही– (रमेश टेलर)दीपावली पर्व पर जालाये जाने वाले दीपको में इस बार मिट्टी से हस्तनिर्मित दीपकों की मांग बढ रही है। राज्य सरकार हो या केंद्र सरकार सभी ने स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देने की अपील के बाद लोगो मे इस बार जाग्रति आई और हर कोई इस दीपावली पर पवित्र माने जाले मिट्टी से बने दीपक खरीद करने की ओर रुख कर रहा हैं।

मिट्टी के दीपक बनाने वाले कारीगर रमेश कुम्हार ने बताया कि वैसे तो हम अपने घरों के आंगन में ही मिट्टी के बर्तन बनाने का काम करते है पर जैसे ही दीपावली आने से पहले हम नवरात्रि से मिट्टी के दीपक बनाने का काम शरू कर देते हैं। जिसके लिए हमें दूर दराज से तालाबों से अच्छी मिट्टी ला कर उसे साफ कर कई दिनों तक भिगोकर रखने के बाद कड़ी महेनत से मिट्टी के दिपक बनाने के काम मे पूरा परिवार लग जाता है। जब कच्चे दीपक बनने के बाद उसे भट्टी में तपाया जाता है तब जा कर दीपक तैयार हो कर बाजारों में जाने के लिए तैयार होते हैं। उन्होंने बताया कि वैसे तो व्यापारी लोग पहले से अपने ऑडर दे देते है। उसकी मांग के हिसाब से हजारों की संखया में दिपक बना कर व्यापारियों तक पहुंचा देते है, और क्षेत्र के ग्रामीण तो दीपावली के कुछ दिनों पहले हमारे यहां आ कर अपने हिसाब से दीपकों की खरीदारी करते है।


चाक पर दिपक बनाने वाले रमेश कुम्हार ने बताया इस कार्य ने पूरा परिवार कड़ी महेनत करता है पर उस हिसाब से हमे भाव नही मिलता है। उन्होंने बताया की कुम्हार के हाथों से बनाये मिट्टी के दीपकों को पवित्र माना गया है। भगवान विष्णु ने शाम को चौक पर धागा प्रदान किया गया है जो आज जनौई रूप में पहना जा रहा है। धनतेरस पर दीपावली पर मिट्टी के दीपक से रोशनी जगमगाती है घरो में खुशहाली एवं माता लक्ष्मी का वास बना रहता हैं यह पुरानी परंपरा है जो सदियों से चली आ रही है। उन्होंने आगे बताया की
दीपावली के दिन मिट्टी के दीपक में तेल डालकर उसका काजल बनाकर आंखों पर लगाया जाता है इससे आंखों की रोशनी बढ़ती है। इस बार मिट्टी के बने दिपक चाइनीज वस्तुओं को टक्कर दे रही है वहीं लोकल फॉर वोकल अभियान को बढ़ावा मिल रहा हैं। अन्य बर्तनों में बनाये खाने से अच्छा है कि मिट्टी के बर्तनो में खाना बनाना एवं उनमें बना खाना खाने से कही बीमारियां दूर होती हैं।

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