बागोड़ा । उपखंड संघर्ष समिति के तत्वावधान में बागोड़ा उपखंड मुख्यालय पर भीनमाल को जिला बनाने अथवा बागोड़ा उपखंड क्षेत्र को पुनः जालोर जिले में सम्मिलित करने की मुख्य दो मांग को लेकर दिनांक 21अगस्त से शुरू हुआ अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन को उसी कड़ी में 6 सितंबर को महापड़ाव व 7 सितम्बर से क्रमिक अनशन शुरू किया गया।
करीबन 48 दिनों तक आंदोलन जारी रहा मगर इस दरमियान सरकार, शासन एवं प्रशासन का कोई नुमाइंदा बातचीत करने तक नहीं आया। यहां तक कि कांग्रेस पार्टी के नेता तो मुख्यमंत्री से मिलने तक का समय भी नहीं ले पाये।
आदर्श आचार संहिता लागू होने की वजह से आज अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन को आदर्श आचार संहिता समयावधि में स्थगित करने की घोषणा करते हुए नांदिया सरपंच हिंगलाजदान चारण बताया कि बागोड़ा उपखंड संघर्ष समिति के संयोजक एवं सहसंयोजक से विचार विमर्श करने के बाद आदर्श आचार संहिता की पालना में बागोडा उपखंड मुख्यालय पर चल रहा अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन एवं क्रमिक अनशन स्थगित किया जाता है। विधानसभा चुनाव सम्पन्न होने के बाद फिर से बागोड़ा उपखंड क्षेत्र के नागरिक अपनी दोनों मांगों को लेकर संघर्ष करेंगे।
भाजपा मंडल नरसाणा के अध्यक्ष पीराराम गोरसिया ने बताया कि भीनमाल जिला नहीं बनने की वजह पुखराज जी पाराशर है जिन्होंने भीनमाल एवं रानीवाड़ा क्षेत्र की जनता के साथ कुठाराघात किया है। बागोड़ा उपखंड संघर्ष समिति एवं भीनमाल विधानसभा क्षेत्र की जनता कांग्रेस पार्टी से चुनाव लडने वाले प्रत्याशी को वोट की चोट से करारा जवाब देगी। कांग्रेस पार्टी की इस बार भीनमाल में ऐतिहासिक हार होगी जिसकी वजह पुखराज जी पाराशर एवं अशोक जी गहलोत की हठधर्मिता है। बागोड़ा सरपंच प्रतिनिधि राजू सिंह चौहान ने बताया कि दोनों पार्टी के नेताओं का हमें सहयोग नहीं मिला।ना ही नेताओं ने हमारी पैरवी की। यहां तक कि सांसद ने तो धरना स्थल पर आना तक उचित नहीं समझा। हम सब मिलकर विधानसभा चुनाव के बाद नई ऊर्जा के साथ संघर्ष फिर से शुरू करेंगे।
तत्पश्चात उपखंड अधिकारी बागोड़ा के मार्फत मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान नांदिया सरपंच हिंगलाजदान चारण, पीराराम गोरसिया, जालम सिंह सोलंकी, राजू सिंह बागोड़ा,रतन खिलेरी, सोमतसिंह सोलंकी, भंवरलाल विश्नोई, मोड़ सिंह बागोड़ा, भागीरथराम विश्नोई ,लाखमसिंह बागोड़ा सहित सेवड़ी, वाड़ा भाडवी, बागोड़ा एवं नांदियां के ग्रामीण उपस्थित रहे।
