◆ 27 फरवरी को फिर होगा आंदोलन
सिरोही –( रमेश टेलर)क्षेत्र की कृष्णावती नदी में भारी मात्रा में खनन को लेकर कृष्णावती नदी संघर्ष समिति के बैनर तले क्षेत्र में भोपू प्रसार कर बायोसा मंदिर में फिर से गुरुवार को अपना अपना काम बंद कर आंदोलन किया जाएगा । समिति के सदस्य ने बताया की बजरी खनन के विरुद्ध जावाल समेत आसपास के गांव के करीब 22 गांवों के लोगों द्वारा आंदोलन होगा ।
उन्होंने बताया की पूर्व में आंदोलन के दौरान जन प्रतिनिधिओ एवं प्रशासन के आश्वासन के बाद आंदोलन को समाप्त किया गया था। लेकिन संघर्ष समिति की मांगों पर कोई ध्यान नही दिया गया । जिससे ग्रामीण क्षेत्र में काफी आक्रोश व्याप्त है। उन्होंने बताया कि जहां समझौता वार्ता के दौरान कृष्णावती नदी में बिना जेसीबी व बिना फ़ॉकलैंड के बजरी ट्रैक्टरों में भरी जाएगी एवं डंपरों द्वारा बजरी बाहर नहीं भेजी जाएगी, परंतु इसका उल्टा बजरी खनन करने वाले ठेकेदारों ने सभी ग्रामीणों की मंशा पर पानी फिरते हुए कृष्णावती नदी के जावाल क्षेत्र में ही करीब चार-पांच पोकलेन लगाकर धड़ले से नियमों के विरुद्ध बजरी खनन हो रहा है।
साथ ही कृष्णावती नदी के क्षेत्र में जगह-जगह पर पोकलैंड मशीनों से दिनरात डंपर भरे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अगर यही स्थिति रही तो आने वाले समय में कृष्णावती नदी लुप्त हो जाएगी और बजरी नाम मात्र की रह जाएगी । जिससे क्षेत्र वासियों को भारी तकलीफ उठानी पड़ सकती है ।
*क्षेत्रवासियों को पेयजल के लिए तरसना पड़ेगा*
समिति के सदस्यो ने बताया कर्षणावती नदी भारी मात्रा में खनन से आने वाले समय मे पीने के पानी के लिए तरसता पड़ सकता है इस बारे में करीब दो माह पूर्व आंदोलन के दौरान संघर्ष समिति के बैनर चले प्रतिनिधिमंडल के साथ में राज्य मंत्री ओटाराम देवासी, सांसद लुम्बाराम चौधरी के साथ तत्कालीन महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष व वर्तमान में जिला अध्यक्ष रक्षा भंडारी के साथ मुख्यमंत्री के आवास पर जाकर मुख्यमंत्री महोदय को कृष्णवती नदी में हो रहे खनन के बारे में अवगत करवाया था । उस दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने आश्वासन दिया कि आपकी जायज मांगों पर विचार किया जाएगा । परंतु उसके दो माह बाद भी स्थिति सुधारने की जगह और भयंकर रूप ले रही है, ठेकेदारों द्वारा दिन रात में करीब सैकड़ो की तादाद में फ़ॉकलैंड मशीन व जेसीबी से बड़े-बड़े डंपर भरकर बजरी का खनन हो रहा है ।
